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अयोध्या : उस जज की पूरी कहानी, जिसपर विवाद हुआ और उसने केस छोड़ दिया

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8 जनवरी, 2019. भारत के चीफ जस्टिस जस्टिस रंजन गोगोई ने अयोध्या मसले पर सुनवाई के लिए पांच जजों की संवैधानिक पीठ बनाई. इस पीठ को 10 जनवरी से सुनवाई करनी थी. लेकिन इस पीठ के बनने के बाद से ही विवाद शुरू हो गया. इस पीठ पर मुख्य रूप से विवाद ये था कि मामले की सुनवाई के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के किसी जज को पीठ में शामिल नहीं किया गया है. और ये पहली बार नहीं था कि किसी पीठ के गठन को लेकर विवाद हुआ था.

पीठ के गठन को लेकर चार जजों ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस

12 जनवरी, 2018. देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. ये प्रेस कॉन्फ्रेंस चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के बाद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जज जस्टिस जे चेलमेश्वर के घर पर हुई. जस्टिस चेलमेश्वर के साथ इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसफ भी मौजूद थे. उस प्रेस कॉन्फ्रेंस का मकसद सिर्फ इतना था कि सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने ये कहा था कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा केस अपने हिसाब से अलग-अलग केस अलग-अलग जजों को देते हैं और उसके लिए बेंच बनाते हैं. इस पर खूब विवाद हुआ. बाद में मामला सुलझा, लेकिन तब तक चीजें बिगड़ चुकी थीं.

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अब वरिष्ठता के हिसाब से बनाई गई थी बेंच

विवाद के बाद जब चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, तो आगे के चीफ जस्टिस के लिए ये मुद्दा बन गया. इसके बाद जब अयोध्या के लिए बेंच बनाने की बात हुई तो चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने अलावा जिन चार जजों को इस बेंच में रखा, वो सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज थे. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के बाद वरिष्ठता के क्रम में नंबर है जस्टिस शरद अरविंद बोबडे का. उनके बाद वरिष्ठ जज हैं जस्टिस नूथलापती वेंकट रमन्ना. जस्टिस रमन्ना के बाद नाम आता है जस्टिस यूयू ललित का. पांचवे जज हैं जस्टिस डीवाई चंद्रचूड. जस्टिस रंजन गोगोई के बाद ये चार लोग क्रम से भरत के अगले चीफ जस्टिस बनेंगे. अब इतनी पारदर्शिता के साथ बेंच बनी थी, तो इसपर विवाद की गुंजाइश नहीं के बराबर थी. लेकिन फिर विवाद हो गया और जस्टिस यूयू ललित ने इस संवैधानिक बेंच से खुद को अलग कर लिया.


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संवैधानिक बेंच से अलग क्यों हो गए जस्टिस यूयू ललित?

पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने 10 जनवरी, 2019 को सुनवाई शुरू की. इस दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कोर्ट में जस्टिस यूयू ललित पर सवाल उठाते हुए कहा कि जस्टिस यूयू ललिज 1994 में कल्याण सिंह के लिए बतौर वकील पेश हो चुके हैं. इस पर हिंदू पक्ष की ओर से आए वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. ऐसा इसलिए है, क्योंकि जिस मामले में जस्टिस ललित पेश हुए थे, वह इस मामले से बिल्कुल अलग था. इसपर धवन ने कहा कि उनकी मांग जस्टिस ललित को बेंच से हटाना नहीं है. वो ये बस जानकारी के लिए बता रहे हैं. लेकिन जब इतनी बात हो गई तो जस्टिस ललित ने खुद को बेंच से अलग करने का फैसला किया. जस्टिस यू यू ललित ने कहा-

जब मैं वकील था, तो मैं बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में सुनवाई के दौरान बतौर वकील एक पक्ष की तरफ से पेश हुआ था. इसलिए अब मैं मामले से हटना चाहता हूं.’

इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि सभी जजों का मत यही है कि इस मामले में जस्टिस ललित का सुनवाई करना सही नहीं होगा. और इसके बाद जस्टिस यूयू ललित बेंच से अलग हो गए. अब बेंच का गठन फिर से किया जाएगा. इसलिए तय किया गया कि मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को नई बेंच करेगी.

और अब बात जस्टिस यूयू ललित की

मुंबई के रहने वाले जस्टिस उदय यू ललित वकीलों के परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके पिता जस्टिस यू.आर. ललित एक क्रिमिनल लॉयर थे. उन्हें बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट का एडिशनल जज बनाया गया. अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए यूयू ललित ने 1983 में मुंबई बार असोशिएसन में रजिस्ट्रेशन करवाया. 1986 में यूयू ललित सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे. सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल सोली सोरॉबजी के साथ काम करने लगे और करीब छह साल तक उनके साथ काम किया. अप्रैल 2004 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील का दर्जा दे दिया गया. इसके बाद पूरे देश में क्रिमिनल लॉयर के तौर पर यूयू ललित का नाम लिया जाने लगा.

कई हाई प्रोफाइल मुकदमों की पैरवी

यूयू ललित देश के कई हाई कोर्ट में बड़े-बड़े मुकदमों की पैरवी करने पहुंचे.

  • इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा और हाई प्रोफाइल मुकदमा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का था, जिनपर सोहराबुद्दीन में फर्जी एनकाउंटर के आरोप लगे थे.
  • जस्टिस यूयू ललित ने गुजरात में हुई तुलसीराम प्रजापति के मुठभेड़ में अमित शाह का नाम सामने आने के बाद उनका बचाव किया था.
  • यूयू ललित ही वो वकील थे, जिन्होंने ब्लैक बक और चिंकारा मारने के मामले में फिल्म ऐक्टर सलमान खान का राजस्थान हाई कोर्ट में बचाव किया था.
  • जब तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह की उम्र पर विवाद चल रहा था, तो यूयू ललित ही जनरल वीके सिंह के वकील थे.
  • छत्तीसगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता बिनायक सेन पर जब देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हुआ था, तो यूयू ललित ने बिनायक सेन की जमानत का विरोध किया था.
  • जस्टिस यूयू ललित पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का भी भ्रष्टाचार के एक मामले में बचाव कर चुके हैं.
  • यूयू ललित ने पुणे के बिजनेस मैन हसन अली खान का भी कोर्ट में बतौर वकील बचाव किया है, जिसपर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे थे.
  • यूयू ललित ने देश के सबसे बड़े घोटाले कहे जाने वाले 1.76 लाख करोड़ रुपये के टूजी घोटाले में बतौर स्पेशल प्रोसिक्यूटर पैरवी की थी.
देश के लिए दिए कई अहम फैसले
  • जस्टिय यूयू ललित उस बेंच का हिस्सा थे, जिन्होंने तीन तलाक पर फैसला दिया था और इसे असंवैधानिक ठहराया था.
  • जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने ही एससी-एसटी ऐक्ट पर फैसला दिया था, जिसके बाद पूरे देश में हंगामा हो गया था.
  • जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने ही महिलाओं के उत्पीड़न के लिए बनी आईपीसी की धारा 498 A के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला दिया था.
  • जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने ही हिंदू मैरिज ऐक्ट पर आदेश दिया था कि अगर रजामंदी से तलाक के केस में समझौते की गुंजाइश न हो, तो छह महीने का कूलिंग पीरियड खत्म हो सकता है.
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