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अमीरी आएगी और घर में बस जाएगी, गरीबों से सीखें ये 5 पाठ

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पैसा हाथ का मैल है। ये लाइन तब भी सच थी जब इसे लि‍खा गया था और आज भी सच है। कुछ लोगों को इस बात में महारथ हासि‍ल हो जाती है कि ये मैल कभी उनके हाथों से न छूटे मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जि‍नके हाथ पर या तो पैसा आता नहीं या फि‍र टि‍कता नहीं। पैसा आपको कई तरह के पाठ पढ़ाता है। उसका होना, न होना और आकर चला जाना- आपको कई सीख देता है। आप अगर गरीबों व बेघरों के जीवन, उनके तौर-तरीकों को बारीकी से नोट करें तो वह आपको रुपए-पैसे के मैनेजमेंट को लेकर कई सीख दे सकते हैं। बि‍गरपॉकेट्स डॉट कॉम ने शेल्‍टर हाउस में रह रहे बेघरों को लेकर एक स्‍टडी की और उनसे 5 खास प्‍वाइंट नि‍काले। आगे पढ़ें

पैसा नहीं रहता तो फैसला लेने की ताकत खत्‍म हो जाती है

गरीब और बेघर लोगों की फैसला लेने की शक्‍ति बहुत कम हो जाती है, क्‍योंकि वह अपने आपको कमजोर महसूस करते हैं। उन्‍हें हर फैसला लेने के लि‍ए कि‍सी की मदद की जरूरत होती है, जि‍से वो अपने से ज्‍यादा ताकतवर समझते हैं।

सीख

अगर आप पॉकेट और दि‍माग के इस रि‍लेशन को जान लेंगे तो आपको दो बातें समझ आ जाएंगी। पहली – अगर पैसा न हो तो भी अपने दि‍माग की मजबूती को बरकरार रखना है। दूसरी – जो लोग गरीब हैं, उनके गलत फैसलों के पीछे की वजह क्‍या है

फाइनेंशि‍यल मि‍समैनेजमेंट से भाग्‍य दुर्भाग्‍य में बदल जाता है

कि‍सी गरीब या बेघर से बात करेंगे तो पाएंगे कि उनके साथ एक के बाद एक ऐसी कई घटनाएं घटती हैं जो उन्‍हें गरीबी से उबरने ही नहीं देतीं। इलाज का खर्च, नौकरी छूट जाना, प्रेगनेंसी, कानूनी पचड़े वगैरह। यहां समझने वाली बात ये है कि जि‍न लोगों के पास अच्‍छी सेविंग और बैकअप प्‍लान होता है, वो ऐसे वक्‍त से उबर जाते हैं। मगर जो अपनी कमाई को सही ढंग से मैनेज नहीं करते, ये घटनाएं उन्‍हें गरीब बना देती हैं।

मार देता है बुरी उधारी

बेघरों और गरीबों से बातचीत में ये बात भी सामने आती है कि आमतौर पर उनपर कि‍सी ना कि‍सी का भारी कर्ज होता है। ये लोग या तो उसे चुकाने की कोशि‍श में लगे रहते हैं या उससे भागने की कोशि‍श में। ऐसे लोग बैंक अकाउंट वगैरह खुलवाने में भी हि‍चकि‍चाते हैं। सरकारी सुवि‍धाओं का लाभ भी सही ढंग से नहीं ले पाते, क्‍योंकि डर रहता है कि जि‍नसे उधार लि‍या है उनका तकादा बढ़ जाएगा। इसीलि‍ए वह अपना ठि‍काना भी बदलते रहते हैं।

सीख

सबसे पहले तो कि‍सी भी कीमत पर बड़ी उधारी को अवॉइड करें। कई बार उधार लेना बहुत आसान होता है और उसी वजह से लोग उधार ले लेते हैं। पुरानी कहावत है – उतने ही पांव फैलाएं, जितनी लंबी चादर है। हां, अगर कि‍सी मजबूरी में उधार ले भी लि‍या तो उसे लौटाने का एक सिस्‍टम बनाएं और उसे फॉलो करें।

अमीर और बेघर एक सी गलती करते हैं

ऐसा नहीं कि पैसा केवल अमीर लोग ही लुटाते हैं, गरीब भी पैसे को गलत तरीके से खर्च करते हैं। आपने सुना होगा, जब कोई शख्‍स अनाप शनाप खर्च करता है तो लोग कहते हैं कि पैसा पाकर पगला गया है।



सीख

सेविंग करना कि‍सी के लि‍ए असंभव नहीं है। सेविंग छोटी या बड़ी हो सकती है। मनी सेविंग इज मनी अर्निंग। खर्च करने से पहले सोचना जरूरी है।

वो कल के बारे में सोचते हैं मगर परसों के बारे में नहीं

ज्‍यादातर गरीब और बेघर दूर का नहीं सोचते। उनकी कंडीशन इतनी टफ होती है कि वह आमतौर पर दो वक्‍त की रोटी के इंतजाम में ही डूबे रहते हैं। उन्‍हें सबसे ज्‍यादा चिंता आज या ज्‍यादा से ज्‍यादा कल की होती है, वह भवि‍ष्‍य की प्‍लानिंग नहीं कर पाते- या यूं कहें कि उन्‍हें मौका ही नहीं मि‍ल पाता।

सीख

आपके पास भले ही रुपए की भारी किल्‍लत हो, मगर आपको फ्यूचर प्‍लानिंग करनी ही होगी। लॉन्‍ग टर्म प्‍लानिंग पर शॉट टर्म प्‍लानिंग को हावी पड़ने नहीं देना चाहि‍ए।

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