Home राजनीति उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर सपा-बसपा में ‘सैद्धांतिक सहमति’, कांग्रेस ने...

उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर सपा-बसपा में ‘सैद्धांतिक सहमति’, कांग्रेस ने कहा- हम अकेले लड़ेंगे

42
5
SHARE
sp-bsp-alliance-sealed-for-loksabha-election-2019-congress-snubs

उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर सपा-बसपा में ‘सैद्धांतिक सहमति’, कांग्रेस ने कहा- हम अकेले लड़ेंगे

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बहुप्रतीक्षित गठबंधन के लिये दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने ‘सैद्धांतिक सहमति‘ कर दी है और गठजोड़ का ऐलान बहुत जल्द होगा. सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी ने बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर ‘सैद्धांतिक सहमति‘ बन चुकी है और उम्मीद है कि इस गठजोड़ की औपचारिक घोषणा जल्द होगी. सम्भावना है कि इसी महीने इसका एलान हो जाएगा. उन्होंने बताया कि गठबंधन को लेकर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है. गुरुवार को भी दोनों नेताओं के बीच दिल्ली में मुलाकात हुई थी.


अखिलेश-माया की प्रेस कॉन्फ्रेंस आज, गठबंधन से 60 सीटों पर भाजपा की राह मुश्किल होगी

इस सवाल पर कि दोनों दलों के बीच उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर क्या सहमति बनी है, सपा प्रवक्ता ने इसकी कोई जानकारी होने से इनकार किया लेकिन इतना कहा कि कुछ छोटे दलों को भी गठबंधन में शामिल करने के लिये बात हो रही है. उन्होंने स्वीकार किया कि गठबंधन में शामिल करने के लिये पश्चिमी उत्तर प्रदेश में असर रखने वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) से भी बातचीत हो रही है. कांग्रेस को गठबंधन में शामिल किये जाने की सम्भावना पर चौधरी ने कहा कि इसका निर्णय तो अखिलेश और मायावती ही लेंगे.


शुक्रवार को फिर महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, जानिए क्या रहे आपके शहर के दाम

बहरहाल, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिये क्रमशः अमेठी और रायबरेली सीटें छोड़ी जाएंगी. मालूम हो कि सपा और बसपा के बीच गठबंधन के बीज पिछले साल गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के दौरान ही पड़ गये थे. इन दोनों सीटों पर बसपा ने सपा प्रत्याशियों को समर्थन दिया था और दोनों ही जगह उन्हें कामयाबी मिली थी. उसके बाद कैराना लोकसभा उपचुनाव में रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने सपा के प्रत्यक्ष और बसपा के परोक्ष सहयोग से जीत हासिल की थी. सपा और बसपा को भरोसा है कि दोनों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से वे उत्तर प्रदेश में भाजपा को परास्त कर सकती हैं.

वैसे, तो पिछले साल हुए उपचुनावों के नतीजों से संकेत मिले थे कि सपा और बसपा उत्तर प्रदेश में गठबंधन करके चुनाव लड़ेंगी, मगर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव खासतौर पर इस गठबंधन के लिये इच्छुक लगे. अखिलेश अक्सर अपने सम्बोधनों में बसपा के प्रति नरम रुख दिखाते रहे हैं. वह तो यहां तक कह चुके हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो वह बसपा के लिये दो कदम पीछे हटने को भी तैयार हैं. उन्होंने हाल में गठबंधन के बारे में कहा था कि यह लोगों और विचारों का संगम होगा.

साल 2014 में ‘मोदी लहर‘ के बीच हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा का वोट प्रतिशत 22.35 था और उसे पांच सीटों पर ही कामयाबी मिली थी, जबकि बसपा 19.77 फीसद वोट हासिल करने के बावजूद एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. यादव-मुस्लिम समीकरण पर काफी हद तक निर्भर रहने वाली सपा और दलितों में जनाधार रखने वाली बसपा के गठबंधन के परिणाम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे हैं. सपा को विश्वास है कि बसपा के साथ उसका गठबंधन आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिये मुसीबत पैदा करेगा.

वहीं, भाजपा का मानना है कि इस गठजोड़ से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी का कहना है कि सपा और बसपा का गठबंधन नापाक और अवसरवादी गठजोड़ है. प्रदेश की जनता अब जाति की नहीं बल्कि विकास की सियासत को ही चाहती है और अगले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा की गलतफहमी दूर हो जाएगी. वहीं दोनों पार्टियों के गठबंधन के बीच कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया ने भी बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा, एक गठबंधन हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है, हमारे कार्यकर्ता तैयार हैं. हमने किसी से भी गठबंधन की बात नहीं की है’

5 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here