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पिछले कुछ वर्षों में लगातार गिरा है मीडिया का स्तर

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कोबरापोस्ट की तहकीकात ऑपरेशन 136 पर वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण सिंह ने कहा कि अब पत्रकारिता पत्रकारों तक सीमित नहीं रही बल्कि ये एक व्यवसाय बन चुकी है।


कोबरापोस्ट की तहकीकात ऑपरेशन 136 पर वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण सिंह ने कहा कि अब पत्रकारिता पत्रकारों तक सीमित नहीं रही बल्कि ये एक व्यवसाय बन चुकी है। ज्यादातर मीडिया घरानों के मालिक बड़े-बड़े व्यापारी है जिनका मकसद लोगों तक सच्चाई पहुंचाना नहीं बल्कि खबरों की आड़ में रुपया कमाना है। जो पत्रकार किसी खास पार्टी या संगठन के दबाव में आकर उसके एजेंडा को खबरों की आड़ में हवा दे रहा है। वो पत्रकार नहीं बल्कि जन संपर्क अधिकारी यानी PRO है। साथ ही इन्होंने कहा कि जो भी पत्रकार ये मानते हैं कि खोजी पत्रकारिता मीडिया का हिस्सा नहीं हैं ऐसे लोग खुद पत्रकार नहीं बल्कि जन संपर्क अधिकारी हैं।

इलेक्ट्रॉनिक घर जो इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया पत्रकारिता को नियंत्रित करते हैं, सिर्फ एक और व्यवसाय है

ऑपरेशन 136 ने जनता को दिखाई मीडिया की शर्मनाक तस्वीर’

ऑपरेशन 136 पर वरिष्ठ पत्रकार सुशील कुमार सिंह कहते हैं कि पेड न्यूज़ का धंधा मीडिया में लंबे समय से चल रहा था, और देश का हर पत्रकार इस सच्चाई को जानता भी था। ल


ऑपरेशन 136 पर वरिष्ठ पत्रकार सुशील कुमार सिंह कहते हैं कि पेड न्यूज़ का धंधा मीडिया में लंबे समय से चल रहा था, और देश का हर पत्रकार इस सच्चाई को जानता भी था। लेकिन कोबरापोस्ट की तहकीकात का बाद ये सच्चाई पहली बार इतने बड़े स्तर पर जनता के सामने पहुंची है। सुशील कुमार सिंह कहते हैं कि उन्हें हैरानी इस बात की है मीडिया जगत के बड़े पत्रकार इस बात को मानने और इस बुराई को दूर करने के लिए बजाए कड़े कदम उठाने के इस सच्चाई से मुंह क्यों मोड़ रहे हैं। इन्होंने मीडिया के इस आचरण को बेहद दुखद और अफसोसजनक भी बताया।

ऑपरेशन 136 पर वरिष्ठ पत्रकार राम कृपाल सिंह ने कहा ‘इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए’

वरिष्ठ पत्रकार राम कृपाल सिंह ने ऑपरेशन 136 पर अपनी राय देते हुए कहा कि मीडिया में पैसे लेकर किसी के पक्ष में खबरें चलाने का मामला काफी गंभीर है


वरिष्ठ पत्रकार राम कृपाल सिंह ने ऑपरेशन 136 पर अपनी राय देते हुए कहा कि मीडिया में पैसे लेकर किसी के पक्ष में खबरें चलाने का मामला काफी गंभीर है लिहाजा इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इन्होंने माना कि मीडिया समाज के बाकी हिस्सों से बिल्कुल अलग नहीं है। जितनी मिलावट समाज के बाकी हिस्सों में है उतनी ही मीडिया में भी है। राम कृपाल सिंह ने कहा कि बिजनेस की एवज़ में तथ्यों के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।

पेड न्यूज़ के मामले पर वरिष्ठ पत्रकार मुकेश शर्मा ने कहा-‘पैसे लेकर खबर चलाने वाली मीडिया को

बीबीसी हिंदी के एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार मुकेश शर्मा ने भी पेड न्यूज़ के मामले पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि इसको बिल्कुल भी जायज़ नहीं ठहराया जा सकता खासतौर से जब पत्रकारिता के सिद्धातों की बात हो।


बीबीसी हिंदी के एडिटर और वरिष्ठ पत्रकार मुकेश शर्मा ने भी पेड न्यूज़ के मामले पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि इसको बिल्कुल भी जायज़ नहीं ठहराया जा सकता खासतौर से जब पत्रकारिता के सिद्धातों की बात हो। इन्होंने माना कि पेड न्यूज़ से ना केवल मीडिया की छवि पर असर पड़ रहा है बल्कि जनता पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। कहीं न कहीं इससे जनता के भरोसे को ठेस पहुंच रही है। सच्चाई को लोगों तक पहुंचाने में अगर आर्थिक दबाव या मजबूरियां बीच में आने लगे तो ये पत्रकारिता के साथ ईमानदारी नहीं बल्कि एक समझौता बन जाती है।

कोबरापोस्ट की तहकीकात पर वरिष्ठ पत्रकार मनोहर नायक बोले-‘ऑपरेशन 136 मीडिया

वरिष्ठ पत्रकार मनोहर नायक ने कहा कि कोबरापोस्ट का ऑपरेशन 136 मीडिया की बहुत ही भयावह स्थिति को बयां करता है। वरिष्ठ पत्रकार मनोहर नायक ने कहा कि कोबरापोस्ट का ऑपरेशन 136 मीडिया की बहुत ही भयावह स्थिति को बयां करता है। बड़े-बड़े पत्रकार जो आजकल टीवी पर बहस भी करते हैं उन्हें देखकर उनकी मानसिकता का अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये कैसे सवाल पूछ रहे हैं। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाने वाला मीडिया निर्जीव निर्जीव हो गया है और ये बेहद हताश करने वाली और सदमा पहुंचाने वाली बात है। मीडिया का ये चेहरा अच्छे और सच्चे पत्रकारों के सपने सपने को तोड़ रहा है।

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