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केके मोहम्मद: जिन्होंने कहा था अयोध्‍या में मस्जिद नहीं मंदिर था, उन्हें मिलेगा पद्मश्री सम्मान

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डॉ. केके मोहम्मद ने दावा किया था कि अयोध्या में 1976-77 में हुई खुदाई के दौरान मंदिर होने के अवशेष होने प्रमाण मिले थे. उन्होंने ये बात मलयालम में लिखी अपनी आत्मकथा ‘जानएन्ना भारतीयन’ (मैं भी एक भारतीय) में भी कही.

मशहूर भारतीय पुरातत्वविद के के मुहम्मद का नाम पद्म पुरस्कार के लिए चुना गया है. पद्म पुरस्‍कारों की घोषणा केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर की थी. मुहम्मद का नाम पद्म श्री पुरस्कार पाने वालों की सूची में शामिल होने के बाद उन्हे बधाई संदेशों के साथ ‘सच बोलने’ के लिए सराहना की जा रही है.

डॉ. केके मोहम्मद ने दावा किया था कि अयोध्या में 1976-77 में हुई खुदाई के दौरान मंदिर होने के अवशेष होने प्रमाण मिले थे. उन्होंने ये बात मलयालम में लिखी अपनी आत्मकथा ‘जानएन्ना भारतीयन’ (मैं भी एक भारतीय) में भी कही. ये खुदाई भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण के तत्कालीन महानिदेशक प्रोफेसर बीबी लाल के नेतृत्व में की गई थी. उस टीम में मोहम्मद भी एक सदस्‍य थे. केके मोहम्मद ने पुरातत्वविद बीबी लाल के साथ काम किया है. जिन्होंने उस खुदाई टीम का नेतृत्व किया जिसने पहली बार 1976-77 में बाबरी मस्जिद स्थल पर एक हिंदू मंदिर के अवशेषों का पता लगाने का दावा किया था.


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1976-77 में हुई खुदाई में क्या निकला था

पुरातत्व वैज्ञानिक डॉ. केके मोहम्मद ने अपनी किताब में लिखा था ‘जो कुछ मैंने जाना और कहा है, वो ऐतिहासिक सच है. हमें विवादित स्थल से 14 स्तंभ मिले थे. सभी स्तंभों में गुंबद खुदे हुए थे. ये 11वीं और 12वीं शताब्दी के मंदिरों में मिलने वाले गुंबद जैसे थे. गुंबद में ऐसे 9 प्रतीक मिले हैं, जो मंदिर में मिलते हैं. मोहम्मद ने ये भी कहा था, खुदाई से साफ हो गया था मस्जिद एक मंदिर के मलबे पर खड़ी की गई थी. उन दिनों मैंने इस बारे में कई अंग्रेजी अखबारों में भी लिखा था, लेकिन उन्हें ‘लेटर टू एडिटर वाले कॉलम’ (अखबार में बहुत छोटी जगह) जगह दी गई थी.

मोहम्मद की राय में, अयोध्या मामले को उन लोगों से ‘बचाए’ जाने की ज़रूरत है, जिन्हें लगता है ताजमहल शिव मंदिर हैं. मोहम्मद का ये भी मानना है कि मुसलमानों को अयोध्या को हिंदुओं को सौंप देना चाहिए, क्योंकि उनके पास मक्का-मदीना है. मोहम्मद ASI से 2012 में रिटायर हुए. उसके बाद उन्होंने हैदराबाद में आगा खान ट्रस्ट के डायरेक्टर के तौर पर काम संभाला.

वामपंथियों के लिए मोहम्मद ने क्या कहा था

डॉक्टर मोहम्मद ने कहा था मंदिर मामले में देश के मुसलमानों को वामपंथी चिंतकों ने गुमराह किया था. अगर ऐसा न हुआ होता तो ये मुद्दा कब का सुलझ चुका होता. उन्होंने कहा था, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के तत्कालीन सदस्य प्रोफेसर इरफान हबीब, रोमिला थापर, बिपिन चंद्रा, एस. गोपाल जैसे वामपंथी इतिहासकारों ने मुस्लिम बुद्धजीवियों का ब्रेन-वाश कर दिया. इतना ही नहीं, इन सबने मिलकर इलाहाबाद हाईकोर्ट को भी गुमराह करने की कोशिश की थी.

मोहम्मद का कहना था, ये सब मुस्लिमों ये समझाने में कामयाब हो गए थे कि 19वीं शताब्दी से पहले मंदिर में तोड़फोड़ करने और वहां बौद्ध और जैन धर्म का केंद्र होने का कहीं कोई जिक्र नहीं है. इस बात का आरएस शर्मा, डीएन झा, सूरज बेन और अख्तर अली जैसे कई वामपंथी इतिहासकारों ने समर्थन किया था.

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