Home उत्तर प्रदेश प्रेरणा: दो बीघा जमीन भी कम नहीं सारा आकाश छूने को

प्रेरणा: दो बीघा जमीन भी कम नहीं सारा आकाश छूने को

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बछरावां के गरीब किसान का बेटा पढ़ रहा वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में

महज दो बीघे जमीन के किसान वीरभान सिंह की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। लेकिन अच्छी बात यह है कि वे निरक्षर नहीं हैं। अक्षर ज्ञान के कारण उन्होंने साधनहीनता और गरीबी के बावजूद बेटे रुद्र को पढ़ाने लिखाने का, इंजीनियर बनाने का सपना संजोया। बेटे की शिक्षा के लिए सदैव जागरूक बने रहे। शिक्षकों की मदद से हर संभव जानकारी लेते, ताकि बेटे को हर सुअवसर का लाभ दिला सकें। पिता की प्रेरणा से बेटे ने भी मन लगाकर पढ़ाई की। वीरभान के पास इतनी आय नहीं थी कि रुद्र को किसी अच्छे स्कूल में भी पढ़ा पाते। मजबूरन गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में उसे पढ़ाने लगे। लेकिन शिक्षकों से और जानकारों से लगातार संपर्क में रहते। पूछते कि बेटे को नवोदय या किसी अच्छे सरकारी स्कूल में दाखिला किस तरह मिलेगा। क्या करें कि बेटा अच्छी शिक्षा हासिल करे। अच्छा भविष्य पा सके।

जहां चाह वहां राह। रुद्र की प्रतिभा को देख स्कूल की शिक्षिका मंजू ने भी वीरभान का हौसला बढ़ाया। रुद्र जब पांचवीं में था, तभी मंजू ने वीरभान को बुलंदशहर और सीतापुर में स्थापित विद्या ज्ञान बोर्डिंग स्कूल के बारे में जानकारी दी। इस स्कूल में एक लाख रुपये से कम की सालाना आय वाले परिवारों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। मंजू के कहने पर रुद्र को इसकी प्रवेश परीक्षा में बैठाने का फैसला वीरभान ने किया। दो महीने प्रवेश परीक्षा के पाठ्यक्रम पर रुद्र ने जमकर तैयारी की। फिर क्या था, जिंदगी ने करवट बदल दी। रुद्र पहले बुलंदशहर फिर सीतापुर और अब अमेरिका के वर्जीनिया में पढ़ रहा है।
रायबरेली के बछरावां कस्बे में रहने वाले वीरभान सिंह के घर जब रुद्र का जन्म हुआ, तब परिवार की माली हालत बहुत खराब थी। इसके बावजूद रुद्र को स्कूल में दाखिला दिलाया और उसकी पढ़ाई-लिखाई पर पूरा ध्यान दिया। कुंडौली प्राथमिक विद्यालय से पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई करने के बाद 2010-11 में रुद्र ने विद्या ज्ञान बोर्डिंग स्कूल में प्रवेश पा लिया। छठी कक्षा की पढ़ाई के लिए वह बुलंदशहर गया। सातवीं की परीक्षा पास करने के बाद इसी बोर्डिंग स्कूल की सुदौली, सीतापुर शाखा में आया, जहां आठवीं की कक्षाएं शुरू हुईं। यहां से बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की।



2017 बैच में बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने वाले कुल दो सौ बच्चों ने एसएटी परीक्षा दी। जो अमेरिकी विश्वविद्यालयों में छात्रवृत्ति के जरिये प्रवेश पाने के लिए दी गई। दो सौ में से सात बच्चों ने अमेरिका स्थित दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में शतप्रतिशत स्कॉलरशिप के जरिये प्रवेश सुरक्षित किया। उन सात मेधावी छात्रों में एक रुद्र प्रताप भी शामिल था। रुद्र को अमेरिका के वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी में बीटेक कंप्यूटर साइंस में एडमिशन मिला। 19 अगस्त को अपनी मां रंजना, पिता वीरभान का आशीर्वाद लेकर वह सात समंदर पार चला गया। रुद्र की उपलब्धि पर माता-पिता के अलावा तीनों बहनें बिपाशा, ज्योतिका और चित्रांशी भी बहुत खुश हैं।

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