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दुश्मनों से भारत की हिफाज़त करने वाले खिलजी के साथ ‘पद्मावत’ में हुई न इंसाफी

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मंगोल अपने समय के क्रूरतम योद्धा समझे जाते थे दुनिया के बड़े बड़े साम्राजों को उन्होंने धुल चटा दी थी वह जहां भी विजेता के तौर पर जाते थे वहाँ कतलआम ज़रूर करते कहा जाता है की उन्होंने जब बग़दाद पर कब्जा किया तो वहां ऐसा क़त्ले आम किया की नालियों में कई दिनों तक खून बहा था और नरमुंडों की मीनार बना दी थी।
वहां के खलीफा मोहतसिमबिल्लाह को कई दिनों जंजीरों में बाँध के भूका प्यासा रखा उसके बाद जब उन्हें हलाकू खान के सामने पेश किया गया तो खलीफा ने भूखे प्यासे होने की बात कही जिस पर हलाकू खान ने उनके सामने सोने के थाल में हीरे जवाहरात पेश किये और कहा लो खाओ मोह्तासिम ने कहा यह कोई खाने की चीज़ है तो हलाकू ने पूछा फिर इसे जमा क्यों किया था अगर इस दौलत से असलहा खरीदते और फ़ौज तय्यार करते तो आज तुम्हारे साम्राज का यह हश्र न होता न तुम को यह दिन देखने पड़ते

अब आते हैं भारत की तरफ उस समय भारत पर अलाउद्दीन खिलजी का शासन था 1298 में मंगोलों ने साल्दी के नेतृत्व में बोलन दर्रे से भारत पर आक्रमण किया और सीबी के किले पर कब्जा कर लिया अलाउद्दीन ने अपने एक बहादुर सेनापति ज़फर खान को मंगोलों के खिलाफ फौजी कार्रवाई के लिए भेजा ज़फर खान ने एक रात अचानक किले पर हमला करके न केवल किला फतह कर लिया बल्कि मंगोल सरदार साल्दी और उसकी पत्नी बच्चों समेत उसकी पूरी सेना को बंधक बना लिया उन्हें जंजीरों में बाँध के दिल्ली रवाना किया गया।

जहां अलाउद्दीन ने उन सबको मौत के घाट उतार दिया कहा जाता है की 1700 मंगोल सैनिकों के मौत के घाट उतारा गया था इस विजय से ज़फर खान न केवल खिलजी की सेना बल्कि पूरे देश में बहुत लोकप्रिय हो गया यहाँ तक की कुछ इतिहास कारों के अनुसार अलाउद्दीन खिलजी भी उससे दिल ही दिल डरने लगा था और उनके खिलाफ कार्रवाई की सोच ही रहा था की अगले साल फिर मंगोलों ने आक्रमण कर दिया इस बार उनका निशाना सीधा दिल्ली थी।

दिल्ली के कोतवाल अताउल मुल्क ने खिलजी को मशविरा दिया की मगोल लुटेरी कौम है उसकी नजर केवल धन दौलत पर रहती है इस लिए उन से लड़ने के बजाय उनको धन दौलत दे के वापस कर दें लेकिन अलाउद्दीन ने यह सलाह नहीं मानी और कहा की एक बार उनको लालच आ गयी तो वह बार बार भारत पर आक्रमण करते रहेंगे इस लिए उनको मैदान जंग में ही हराना होगा वही हुआ खिलजी के बहादुर जनरलों जिन में ज़फर खान भी शामिल था मंगोलों के घेर के बुरी तरह उनको हराया लेकिन खुद जफर खान किसी तरह मंगोलों के जाल में फंस गया और लड़ते हुए शहीद हो गया

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1303 में मंगोलों ने फिर दिल्ली पर हमला किया उस समय अलाउद्दीन चित्तोड़ में था हमले की सूचना मिलते ही वह खुद दिल्ली आ गया और सीरी के मैदान में अपनी फ़ौज ले के पहुँच गया अलाउद्दीन के खुद मैदान में आ डटने से मंगोल घबरा गए और बिना लडे ही वापस चले गए, इस प्रकार मंगोलों के तीन तीन हमलों को विफल कर के अलाउद्दीन ने भारत को मंगोलों की क्रूरता और क़त्ले आम से बचाया

सैनिक अभियान ही नहीं खिलजी ने रेवेन्यु और बाज़ार व्यवस्था में भी बहुत बहुत बड़े बड़े काम किये जिससे गरीबों को बहुत राहत मिली,हर वास्तु के दाम निश्चित थे और दामों पर नजर रखने के लिए सरकारी अमला तयनात किया गया था कम तौलने पर सख्त सजा का प्रावधान किया अर्थात किसी दुकानदार ने जितना कम तौला उतना मांस उसके जिस्म से काट लेने का आदेश दिया जिसके डर से कोई कम तौलने या अधिक दाम लेने की सोचता भी नहीं था कहा जाता है कि रोटी निश्चित मूल्य से अधिक पर बेचने के जुर्म में उस ने खुद कई नानबाइयों को उन्ही के तंदूर में डाल दिया था

बेशक खिलजी में बहुत सी कमजोरियां और बुराइयां भी थीं लेकिन उसकी शासन व्यवस्था की तारीफ़ सभी इतिहासकारों ने की है उसकी दो और हिन्दू रानियाँ थीं जिनमें से एक का बेटा खिलजी के बाद भारत का सुलतान बना थाI भंसाली ने अपनी कमीनगी और देश के मौजूदा माहौल को देखते हुए जो फिल्म बनाई है उसे इतिहास के साथ बलात्कार के अलावा और कुछ नहीं कहा जा सकता

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