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गन्ना किसानों को संकट से उबारने के लिए 8000 करोड़ के पैकेज की तैयारी

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केंद्र सरकार ने देश के गन्ना किसानों को संकट से उबारने के लिए 8000 करोड़ के बेल आउट पैकेज की योजना बनाई है. इस हफ़्ते इसे कैबिनेट की मंज़ूरी मिल सकती है. लेकिन गन्ना किसानों के संगठनों का कहना है, ये रक़म काफ़ी नहीं.


कैराना और नूरपुर में उपचुनावों के नतीजे के बाद जिन्ना बनाम गन्ना का नारा उछला. अब केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने गन्ना किसानों की राहत के लिए 8000 करोड़ का पैकेज तैयार किया है. इसी हफ़्ते इसे कैबिनेट की मंज़ूरी मिल सकती है. खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा ”शुगर सेक्टर के लिए 8000 करोड़ के बेलआउट पैकेज पर हमारा कैबिनेट नोट तैयार हो गया है. बहुत जल्दी कैबिनेट के सामने आएगा.”
दरअसल इस साल किसानों पर गन्ने की रिकॉर्ड उपज का बोझ है.गन्ने के दाम 26 रुपये किलो से 28 रुपये तक हो गए हैं. ऐसे में संकट में पड़े चीनी उद्योग के लिए सरकार कई योजनाएं लेकर आई है. 30 लाख टन का बफ़र स्टॉक बनाने की बात है. चीनी मिलों के लिए दाम तय होंगे. उनकी स्टॉक सीमा भी तय होगी. और गन्ने से इथिनॉल बनाने को बढ़ावा दिया जाएगा.


हालांकि किसान नेता याद दिला रहे हैं कि किसानों का बक़ाया ही 22,000 करोड़ का है. चौधरी पुष्पेंद्रपाल सिंह ने कहा “इन्हें भुगतान करना है कुल 22 हज़ार करोड़ का और पैकेज दिया है 8000 करोड़ का इतने से तो आधा भुगतान नहीं होगा. उस पर तो ब्याज भुगतान की बात भी नहीं है. सरकार 30 लाख टन का बफ़र स्टॉक बनाने की बात कर रही है जिसकी लागत लगभग 9000 करोड़ आएगी. क्या इसके लिए अलग पैसा दिया जाएगा?”
प्रस्तावित बेलआउट पैकेज चीनी मिलों और गन्ना किसानों को संकट से उबारने की इस साल की पहली बड़ी कोशिश है. लेकिन गन्ना किसानों का बकाया 22000 करोड़ तक पहुंच गया है. और अगल बेलआउट पैकेज से हालात नहीं सुधरे तो सरकार को फिर हस्तक्षेप करना पड़ सकता है.

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