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पटाखे नहीं दलितों के घर जलाए जाते हैं, भाजपाई ‘रामराज्य’ में ऐसे जश्न मनाए जाते हैं

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यूपी में बीजेपी की सरकार बनी और उसके 2 महीने बाद ही सहारनपुर में राजपूत दबंगों ने दलित बस्ती में आग लगा दी जिससे 56 घर जल गए।
ठीक इसी पैटर्न पर काम करते हुए, ज्यों ही बिहार में भाजपा नीतीश संग शासन में आई और उसके 2 महीने बाद बिहार के खगड़िया में दबंगों ने दलितों के घर जला दिए, जिससे 50 घर पूरी तरह से जल गए ।

दोनों घटनाओं में एक चीज कॉमन है कि दबंगों ने दलितों के घर जलाए और वहां पर सरकारें भाजपा शासित रही। यानी धन बल और बाहुबल से लैस दबंगों को पूरा भरोसा है कि भाजपा के शासन दलितों को कोई न्याय नहीं मिलेगा इसलिए वह इस तरह कि घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं ।

इसको बढ़ावा देने में सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े करना अगर अति लग रही हो तो गौर करना होगा सहारनपुर वाले प्रकरण में क्या हुआ , जिसमें दलित बस्ती जलाई जाती है , दबंग जातियों के खिलाफ कारवाई करने के बजाय दलितों की भीम आर्मी के नवयुवकों को गिरफ्तार किया जाता है।

जिस तरह की घटना पर कड़ी कार्यवाही करते हुए देश भर में एक सख्त संदेश देना चाहिए था कि दलितों पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, उसपर योगी सरकार ने नरमी बरती कि दबंगों के मनोबल बढ़ गए और दलितों पर अत्याचार बढ़ने लगा।

जहां जहां भाजपा शासन है दलितों पर अत्याचार करने से पहले दबंगों में कोई भी हिचकिचाहट नहीं होगी क्योंकि उन्होंने देख लिया कि इन मामलों में कोई खास कार्यवाई नहीं होती।

जब देश दिवाली का जश्न मना रहा था तो ये दबंग लोग दलितों के घर में आग लगाकर अपनी ताकत का जश्न मना रहे थे।

इस घटना के बाद दर्जनों परिवार बेघर हो गए और अब सड़क पर आकर रहने को मजबूर हैं।

जमीन पर कब्जा और वर्चस्व को लेकर दो जातियों में चल रही इस विवाद से जिस तरह का माहौल बना हुआ है भाजपा और जेडीयू द्वारा शासित राज्य में पुलिस के लचर रवैया का यही नमूना है।

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