Home समाचार सवर्ण आरक्षण से गरीबों को लाभ कम, नुकसान अधिक होने की आशंका

सवर्ण आरक्षण से गरीबों को लाभ कम, नुकसान अधिक होने की आशंका

48
4
SHARE
benefits-to-the-poor-from-the-general-reservation-is-less-than-loss
सवर्ण जातियों में ग़रीबों के लिए दिया जा रहा 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ फिलहाल अनारक्षित वर्ग के तीन चौथाई हिस्से से ज्यादा को मिलने का संभावना है। लेकिन इससे उन्हें लाभ होने के बजाए नुकसान भी हो सकता है। राष्ट्रीय सैंपल सर्वेक्षण संस्थान के आंकड़ों के मुताबिक देश में 95 प्रतिशत परिवारों की सालाना आय आठ लाख रुपये से कम है। एक हजार वर्गफुट से कम भूमि पर मकान वालों की संख्या 90 प्रतिशत है। इसी तरह कृषि जनगणना के अनुसार 87 प्रतिशत किसान के पास कृषि योग्य भूमि का रक़बा पांच एकड़ से कम है।

गन्ना किसानों को संकट से उबारने के लिए 8000 करोड़ के पैकेज की तैयारी

यानी सरकार द्वारा घोषित ग़रीब की परिभाषा के मुताबिक देश की 90 फीसदी आबादी ऽआर्थिक आधार पर आरक्षणऽ के लाभार्थियों की श्रेणी में आती है। इसमें पिछडे़ और दलित भी शामिल हैं जिनके लिए अलग से 50 प्रतिशत का आरक्षण है। यानी देश की आबादी में 40 फीसदी सवर्ण ग़रीब हैं। अभी तक यह 40 फीसदी आबादी 50.5 प्रतिशत अनारक्षित सीटों के लिए होड़ करती थी।

42 रुपए का ये फार्म भरने पर हर महीने 5 हजार रुपए देगी मोदी सरकार, सीधे अकाउंट में आएगा पैसा

लेकिन सरकार द्वारा इनके लिए अलग श्रेणी बनाए जाने के बाद इनमें केवल 10 प्रतिशत आरक्षित सीटों के लिए प्रतियोगिता होगी। जबकि 10 प्रतिशत ‘अमीर’ लोगों के लिए 40.5 प्रतिशत अनारक्षित सीटें ‘बच जाएंगी’। जाहिर है उनके लिए कट ऑफ प्रतिशत कम होगा जबकि गरीब सवर्णों की श्रेणी में मेरिट का कट ऑफ काफ़ी ऊंचा होगा।

किसान सम्मान योजना: इन किसानों के खाते में नहीं आएंगे पैसे?

कानूनी स्थिति

सुप्रीम कोर्ट दीपा ई वी के मामले में दो साल पहले ही फैसला सुना चुका है कि यदि कोई व्यक्ति एक श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ उठाना चाहता है तो वह दूसरी श्रेणी के तहत लाभ उठाने का दावा नहीं कर सकता। दीपा ने ओबीसी कैटगरी के तहत नौकरी के लिए आवेदन किया था लेकिन उनका चयन नहीं हो सका।


तब उन्होंने अदालत से अपील की उनका चयन सामान्य वर्ग के तहत हो रहा है। उन्हें इसकी अनुमति दी जाए। लेकिन अदालत ने यह कहते हुए साफ इंकार कर दिया कि वे उम्र में ओबीसी वर्ग के तहत रियायत ली और इंटरव्यू भी उसी वर्ग के तहत दिया। इसलिए वे सामान्य वर्ग के लिए चयन की पात्र नहीं हैं।/div>

कानूनी खामियां

संविधान विशेषज्ञ संजय पारेख कहते हैं कि यह कानून यदि बन भी गया तो ज्यूडीशियल स्क्रूटनी (अदालत की जांच) में खरा नहीं उतर पाएगा। 95 प्रतिशत ग़रीब जनता के लिए 60 प्रतिशत आरक्षण और पांच प्रतिशत अमीरों के लिए 40 प्रतिशत पद, न तो अदालत मानेगी और न ही संविधान निर्माताओं के बनाए मानकों पर।

बहुत विसंगतियां

आम आदमी पार्टी सांसद संजय सिंह कहते सरकार हड़बड़ी में जो बिल लाई है वह बहुत विसंगतियों से भरा है। इससे ग़रीबों को लाभ के बजाए हानि ज्यादा होगी। सामाजिक समरसता खत्म होगी सो अलग। यह मोदी सरकार का केवल अमीरों को फायदा पहुँचाने का प्रयास है। केवल चुनाव में लोगों को गुमराह करने के लिए यह कानून बनाया जा रहा है।

#latest news of promotion in reservation, #reservation in promotion in maharashtra latest news in marathi,
#breaking news in Hindi, #india news in Hindi, #breaking news india today, #jagran Hindi news, #top news in Hindi, #latest news india in Hindi, #latest breaking news in Hindi, #Hindi news channel, #today latest news in Hindi, #Hindi newspaper online,