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भारतीयों को डर्टी फ्यूल बेचकर बीमार कर रहा अमेरिका, जानिए कैसे

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America is sick by selling Dirty Fuel, know how

नई दिल्ली

देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया कि सारे देश में विश्लेषण और मंथन शुरू हो गया। स्वास्थ्य के लिए अति हानिकारक इस प्रदूषण के लिए जो कारण जिम्मेवार निकले हैं उनमें एक कारण अमेरिकी तेल कंपनियां हैं। जी हां, अगर आपको यकीन न हो तो हम आपको बताते हैं। ये वो तेल कंपनियां हैं जोकि भारत की गंदा ईंधन (डर्टी फ्यूल ) एक्सपोर्ट करती हैं। ये वो ईंधन है जिसे अमेरिकी कंपनियां अपने देश में बेच नहीं पा रहीं। ये पेट्रोलियम कोक एक तो काफी सस्ता होता है और दूसरा कोयले से ज्यादा तेज जलता है लेकिन धरती को गर्म करने वाला कार्बन भी इसमें काफी ज्यादा होता है। सस्ते और ज्यादा देर तक चलने के चक्कर में ये फेफड़ों को बहुत नुकसान पहुंचाता है क्योंकि इसमें सल्फर की मात्रा काफी ज्यादा होती है।

दरअसल ये ऐसा ईंधन होता है जोकि एक प्रयोग हो चुका होता है। भारत एक ऐसा देश है जहां ऊर्जा की मांग काफी अधिक है। अमेरिका इसी बात का फायदा उठाता है और दुनियाभर को सप्लाई किए जाने वाले पेट कोक की सबसे अधिक मात्रा भारत में भेजता है। एक आंकड़े के मुताबिक ये मात्रा दुनियाभर का एक चौथाई हिस्सा है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल 2016 में अमेरिका ने भारत को 80 लाख मीट्रिक टन से भी ज्यादा पेटकोक भारत भेजा। यह मात्रा 2010 की तुलना में 20 गुना ज्यादा है। यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि न्यूयॉर्क शहर में स्थित एंपायर स्टेट बिल्डिंग को 8 बार भरा जा सकता है। अमेरिका से मिले इस ईंधन को भारतीय फैक्ट्रियां धड़ल्ले से जला रही हैं क्योंकि उन्हें सस्ता और ज्यादा देरतक चलने वाला ईंधन मिल रहा है।
इस सबके बीच में वे ये भूल जाते हैं कि इस ईंधन के जलने से प्रदूषण बढ़ेगा और लोगों के स्वास्थ्य को काफी नुकसान पहुंच रहा है। जैसे कि देश की राजधानी दिल्ली की बात करें तो दिल्ली की आबोहवा इतनी खराब हो गई है कि लोगों के फेफड़े तक खराब हो रहे हैं। कई लोग इनहेलर दिखाते हुए कहते हैं, उनको सांस लेने में भी परेशानी होती है। 

टेस्ट से खुली पोल

इस पेट कोक का लैबरेटरी टेस्ट किया गया तो पता चला कि आयातित पेटकोक में कोयले के लिए तय सीमा से 17 गुना ज्यादा सल्फर मौजूद है। इसमें डीजल से 1380 गुना ज्यादा सल्फर है। हालांकि प्रदूषण के कई और कारण भी हैं लेकिन
इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि पेटकोक दशकों से एक महत्वपूर्ण ईंधन माना जाता रहा है।

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